हाइड्रोकार्बन के अपारंपरिक स्रोतों, जिनमें गैस हाइड्रेट्स एक अग्रदूत है, की खोज के इर्दगिर्द अनुसंधान का एक नया विषय विकसित हुआ है। इन स्रोतों में गैस हाइड्रेट्स एक अग्रदूत है। गैस हाइड्रेट्स (मेथेन और पानी का क्रिस्टलीय रूप), एक महत्वपूर्ण भविष्य ऊर्जा संसाधन, भूकंपी बिम्बों के साथ-साथ ऊष्मा प्रवाह अध्ययनों का उपयोग करके भारतीय अपतट क्षेत्र के समानांतर निरूपित किए गए हैं। सीएसआईआर-एनजीआरआई ने भारतीय महाद्वीपीय उपांत के समानांतर गैस हाइड्रेट्स की पहचान और मात्रात्मक मूल्यांकन करने के लिए भूकंपी क्षीणन, गुण, यात्रा समय टोमोग्रैफी, ए वी ओ प्रतिरूपण, पूर्ण-तरंग प्रतिलोमन, शैल भौतिकी प्रतिरूपण के आधार पर कई पथप्रदर्शक खोजें की हैं। कृष्णा-गोदावरी, महानदी और अंडमान क्षेत्रों में बहुसरणी समुद्री भूकंपी (एम सी एस) डाटा का उपयोग करके तली अनुकारी परावर्तक (बी एस आर) (गैस हाइड्रेट्स के लिए चिह्नक) की पहचान करके गैस हाइड्रेट्स का पता लगाया गया। एम सी एस डाटा के प्रति अत्यधिक अरैखिक पूर्ण-तरंगरूप प्रतिलोमन नियोजित करके गोवा और सौराष्ट्र अपतट में पतले हाइड्रेट-धारी अवसाद खोजे गए। एनजीआरआई ने भारतीय जलमग्न सीमा के समानांतर गैस हाइड्रेट स्थिरता मोटाई मानचित्र की तैयारी में सक्रिय रूप से भाग लिया। नियत पृष्ठभूमिक घनत्व के साथ आवृत्ति डोमेन में एक ध्वनिक पूर्ण तरंगरूप प्रतिलोमन (एफ डब्ल्यू आई) ने पूर्वी भारतीय उपांत की कृष्णा गोदावरी द्रोणी में गैस हाइड्रेट धारी अवसादों की महीन माप वेग संरचना स्पष्ट की। यहाँ 2010 में 12.5 मीटर अभिग्राही अन्तराल, 25 मीटर विस्फोट अंतरण और 100 मीटर निकट ऑफसेट के साथ 360 सरणियों का उपयोग करके बहुसरणी भूकंपी डाटा अर्जित किए गए। एक अनुमानित सरंध्रता तरंगिका, निम्न आवृत्ति प्रतिरूप और प्रतिरूप आधारित प्रतिलोमन के उपयोग करने के द्वारा किए गए पोस्ट-स्टैक भूकंपी डाटा के प्रतिलोमन से बनाई गई सरंध्रता आकलन की एक कार्यप्रणाली को दो प्रकार के 2 विमीय पोस्ट-स्टैक भूकंपी डाटासेटों पर कार्यान्वित किया गया है; (अ) गैस हाइड्रेट अवसादों से युक्त गभीर जल महानदी (एम एन) अपतट और (ब) कृष्णा गोदावरी उथले अपतट में मृत्तिका समृद्ध, शेलीय अवसाद। विविध शैलसमूहों की पूर्वानुमानित सरंध्रताएँ मानों की यथार्थिक सीमाओं के भीतर होते हुई पाई गई।

भूकंपी लक्षणों के आधार पर भ्रंश, पंक प्रगुम्बद, पंक ज्वालामुखी, लवण पिंडों, अविपंक निक्षेप, गैस के मेघों / चिमनियों से आने वाले मलबे जैसे भूगर्भीय रूपों के बीच भेद करने के लिए कृत्रिम तंत्रिक नेटवर्क का उपयोग करने के द्वारा एक महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की गई है। यह अध्ययन पेट्रोलियम प्रणाली को समझने के लिए एक पूरक औजार के रूप में कार्य करता है और पेट्रोलियम उद्योग के लिए भविष्य के अन्वेषण कार्यक्रम में जोखिमों को कम करने के लिए निवारक सुराग उपलब्ध कराता है। इस तकनीक में यह भी क्षमता है कि इसे तैलाशय गुणधर्मों जैसे कि सरंध्रता, पारगम्यता, संतृप्ति आदि को अभिलक्षणित करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

नाम पदनाम
डॉ. कालाचाँद साँई वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक
डॉ. प्रसाद पी. एस. आर वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक
डॉ. उमा शंकर (लियन पर बी एच यू, वाराणसी में कार्यरत) वरिष्ठ वैज्ञानिक
डॉ. सत्य वाणी एन वरिष्ठ वैज्ञानिक
डॉ. महेश्वर ओझा वैज्ञानिक
श्री प्रसाद ए. एस. एस. एस. आर. एस प्रधान तकनीकी अधिकारी
श्रीमती प्रशांति ए वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (2)
श्री विवेकानन्द पाण्डेय वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (1)
मो. रफीक शंशोद्दीन तकनीकी सहायक
श्री सतेन्द्र सिंह तकनीकी सहायक
श्री अनिल कुमार जी वरिष्ठ तकनीशियन (2)

 

पृष्ठ अंतिम अपडेट : 18-07-2018