मध्य भारतीय क्षेत्र का जटिल भूविज्ञान है। इस क्षेत्र में गोदावरी द्रोणिका, बस्तर क्रेटॉन (छत्तीसगढ़ द्रोणी सहित), पूर्वी घाट गतिशील पट्टी क्षेत्र, महानदी द्रोणिका और दक्कन ट्रैप का कुछ भाग, उत्तरी सिंहभूम पर्वतजन एवं पूर्वी धारवाड़ क्रेटॉन शामिल हैं। इस क्षेत्र का आवीक्षण पैमाने के वायुचुंबकीय आंकड़ों द्वारा भलीभाँति अध्ययन किया गया, अनुमाप स्पेक्ट्रमी विधि का उपयोग करके आधार और उथले असंगत चुंबकीय स्रोतों के अनुमान के लिए विश्लेषित किया गया। उथली चुंबकीय असंगतियों को 1 से 3 किमी. तक बदलते हुए देखा गया है जबकि चुंबकीय आधार गहराई मान 2 से 7 किमी. तक बदलते हुए देखे गए। 2 किमी की सब से उथली वाली आधार गहराई कांकेर ग्रेनाइटों, जो कि बस्तर क्रेटॉन का एक भाग है, से मेल खाती है, जबकि 7 किमी की सब से गहरी वाली आधार गहराई गोदावरी द्रोणी और पार्वतीपुरम बोब्बिलि भ्रंश के पास के पूर्वी घाट गतिशील पट्टी क्षेत्र के दक्षिणपूर्वी भाग से मेल खाती है। अनुमानित आधार गहराई मान पहले के भूभौतिकीय अध्ययनों से प्राप्त मानों के साथ अच्छे से सहसंबंधित होते हैं। पहले के भूभौतिकीय अध्ययन कुछ विवर्तनिक इकाइयों तक सीमित हैं जबकि हमारा अनुमान इस क्षेत्र के लिए विस्तृत चुंबकीय आधार मानचित्रण उपलब्ध कराता है। इस क्षेत्र में चुंबकीय आधार और उथली गहराई मान जटिल विवर्तनिक, विषमांगता और विविध गहराइयों पर अंतर्वेधी पिंडों को सूचित करते हैं, जिसके लिए कैम्ब्रियनपूर्व काल से विविध ताप-विवर्तनिक प्रक्रियाओं को उत्तरदायी माना जा सकता है।

 

नाम पदनाम
डॉ. अजय मांगलिक मुख्य वैज्ञानिक
श्री राज कुमार आर वरिष्ठ वैज्ञानिक
डॉ. प्रशांति लक्ष्मी एम वैज्ञानिक
श्री श्रीकांत एन वैज्ञानिक
श्री रायुडु कृष्ण किशोर वैज्ञानिक
डॉ. के.वी. प्रवीण कुमार वैज्ञानिक
श्री त्यागराजन एस वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (3)
श्रीमती परवीन बेगम शेख वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (1)
श्री सुरेश एम वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (1)
श्री प्रवीण डी तकनीकी अधिकारी
श्री प्रदीप कुमार वी तकनीकी सहायक
श्री धरावथु शेषु तकनीकी सहायक
श्री रामचंद्र राव जी वरिष्ठ तकनीशियन (2)
श्री मल्लिकार्जुनय्या बी वॉश बॉय (एम ए सी पी)

 

पृष्ठ अंतिम अपडेट : 01-10-2018