हाइड्रोकार्बन अन्वेषण

इस युग में, जब प्रधान तेल/गैस क्षेत्र घटते जा रहे हैं, ऊर्जा सुरक्षा की ओर अपरंपरागत एवं नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के लिए भारत जैसे ऊर्जा-अभावग्रस्त देशों द्वारा खोज की जा रही है। यह संस्थान ऊर्जा सुरक्षा के लिए संभाव्य हाइड्रोकार्बन और आर्थिक खनिज मंडलों का पता लगाने के लिए किए जाने वाले राष्ट्रीय अन्वेषण कार्यक्रमों में मदद करने में अग्रसक्रिय भूमिका निभाता है। भारतीय सीमांत के समानांतर गैस-हाइड्रेट के रूप में पूर्वानुमानित मेथेन की मात्रा देश के मौजूदा प्राकृतिक गैस भंडारों से 1500 गुना अधिक है, और सिर्फ 10% प्राप्ति करीब 100 वर्षों तक भारत की भारी ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए अवसादी द्रोणियों के संरचनात्मक विन्यास भूकंपी विधियों के जरिए मानचित्रित किए गए हैं। भारत में हाइड्रोकार्बनों की संसाधन संभाव्यता का मूल्यांकन करने के लिए एकीकृत भूकंपकी, गुरुत्व तथा चुंबकीय एवं चुंबक-पार्थिवविज्ञान और गभीर प्रतिरोधकता अन्वेषणों का इस्तेमल करके हाइड्रोकार्बनों के लिए सीएसआईआर-एनजीआरआई में चित्रण एवं निर्धारण कार्य किया जा रहा है। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण अवसादी द्रोणियों की अधस्तल संरचनाओं और आधार विन्यास की गुरुत्व विषमताओं का विश्लेषण करने के लिए प्रासंगिक साफ्टवेयरों के साथ जुड़ी बहुत सी नवीन तकनीकें देश में ही विकसित की गई हैं। निर्माण रचना एवं वियोजन बलगतिकी समझने और उपयुक्त उत्पादन प्रौद्योगिकी विकसित करने हेतु इनपुट उपलब्ध कराने के लिए प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ भूकंपी आंकड़ों का व्युत्क्रमण, प्रक्रमण, प्रतिरूपण एवं निर्वचन करने के लिए विश्व-स्तर सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक गैस हाइड्रेट अनुसंधान केंद्र सीएसआईआर-एनजीआरआई में स्थापित किया गया। अवसादी द्रोणियों में हाइड्रोकार्बन पूर्वेक्षण के लिए प्रासंगिक मृदा गैस विश्लेषण के लिए आवश्यक सुविधाओं के साथ एक भूरसायनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है।