हमारे बारे में

राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एन.जी.आर.आई.), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की एक संघटक प्रयोगशाला है। पृथ्वी विज्ञान के बहुविषयी क्षेत्रों में अनुसंधान करने के ध्येय से इसकी स्थापना 1961 में की गई। संस्थान इंजीनियरी भूभौतिकी, भूकंप विज्ञान, भूगतिकी एवं भू-पर्यावरण के अध्ययन के अतिरिक्त हाइड्रोकार्बन, खनिज तथा भूजल स्रोतों के अन्वेषण में कीलकीय भूमिका निभाता है। संस्थान में स्टाफ की संख्या 375 है जिसमें पृथ्वी विज्ञान में व्यापक अनुसंधानरत 100 के लगभग उच्च योग्यता प्राप्त वैज्ञानिक हैं और उतनी ही संख्या में मौजूद बहुत ही दक्ष तकनीकी स्टाफ दत्त अर्जन, दत्त संसाधन तथा क्षेत्रीय अन्वेषणों में इनकी सहायता करते हैं।

क्षमताएँ

  • भूकंप जोखिम मूल्यांकन::
    संस्थान भूकंपों के विषय में सक्रिय इलाकों की निरंतर जाँच, प्रतिरूपण तथा मंडल निर्धारण, जोखिम मूल्यांकन, जलाश्य जनित भूकंपनीयता का मापन करता है।
  • इंजीनियरी भूभौतिकी:
    संस्थान आधार शैल, सुरंगन, भारी इंजीनियरी ढाँचे, खुदाई से संबंधित अध्ययन, गतिशील प्रत्यास्थ गुणधर्म जैसे सिविल तथा खनन संबंधी कार्य, पुरातात्विक निर्माणों का निरूपण, स्थायित्व अध्ययनों के लिए कंपन तथा रव अध्ययन करता है।
  • भूजल प्रबंधन अध्ययन:
    संस्थान भूजल संसाधनों का मूल्यांकन करता है साथ में इसके आपद-मुक्त अनुकूलतम प्रबंधन, जल संचयन एवं अधस्थल पुनर्भरण अध्ययनों के लिए जटिल जलभृत तंत्रों का प्रतिरूपण भी करता है।
  • प्राकृतिक संसाधनों का अन्वेषण:
    संस्थान तेल, भूजल और कोयला, हीरा, सोना तथा हीन धातुओं, और भूतापीय ऊर्जा के अन्वेषण के लिए परावर्तन एवं अपवर्तन भूकंपन अध्ययन, गभीर प्रतिरोधकता, प्रेरित ध्रुवण एवं विद्युत चुंबकीय अध्ययन, मैग्नेटोटेलूरिक अध्ययन, चुंबकीय, गुरुत्व, सिन्टिलोमेट्रिक तथा हीलियम-एमिनॉमेट्री अध्ययन करता है।
  • अंटार्कटिक अध्ययन:
    संस्थान अंटार्कटिका में अधोहिमानी आधार-भौमिकी के लक्षण जानने के लिए भूभौतिकीय सर्वेक्षण, भूपर्पटीय विरूपण अध्ययनों के लिए संरचना, विवर्तनिकी तथा पुरा-पुनर्निर्माण, विस्तृत-बैंड भूकंपी स्टेशन, जीपीएस मापन आदि करता है।
  • समुद्री भूभौतिकीय सर्वेक्षण:
    संस्थान हिंद महासागर तल के उद्भव से संबंधित प्रक्रियाओं के अध्ययन और हाईड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए अपतटीय क्षेत्रों में चुंबकीय, गुरुत्व, भूकंपी, अनुगभीर सर्वेक्षण करता है।
  • वायुवाहित भूभौतिकीय सर्वेक्षण:
    संस्थान क्षेत्रीय तथा विस्तृत अध्ययनों के लिए बहुपरामितीय (चुंबकीय, रेडियोमापी एवं विद्युतचुंबकीय) हवाई-भूभौतिकीय (हेलीकॉप्टर उपयोग करके भी) सर्वेक्षण और परिरेखा तथा बिंब मानचित्र तैयार करता है।
  • भूभौतिकीय आँकड़ों की व्याख्या:
    संस्थान प्राकृतिक संसाधनों का अन्वेषण तथा भूगतिकीय अध्ययनों के लिए भूभौतिकीय डाटा का संसाधन, प्रतिरूपण, प्रतिलोमन करता है और गहराई-काट और बिंब मानचित्र तैयार करता है।
  • गहन भूपर्पटीय एवं स्थलमंडलीय ढाँचों का अध्ययन:
    इस अध्ययन के लिए संस्थान भूकंपी गभीरता मापन, भूकंपी टोमोग्राफी, मैग्नेटो टेलूरिक, गुरुत्व एवं भूतापीय परीक्षणों के जरिए बिंबन कार्य करता है।
  • पर्यावरणीय अध्ययन:
    इस अध्ययन में अपशिष्ट निपटान स्थलों और प्रदूषकों को दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए क्षेत्र परीक्षण एवं प्रतिरूपण किया जाता है तथा उपचारात्मक उपायों के लिए सुझाव दिया जाता है।

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