सैद्धान्तिक भूभौतिकी

सैद्धान्तिक भूभौतिकी सीएसआईआर-एनजीआरआई में प्रोत्साहन दिए गए बहुत पहले के अध्ययन विषयों में से एक था। इस तरह का महत्व दिया जाना बहुत से समकालीन पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान संस्थानों के लिए काफी असाधारण है। यहाँ भूभौतिकीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए विचारों को गणितीय समीकरणों में बदलने और उनके हलों का अनुप्रयोग करने के द्वारा सांतत्यक भौतिकी के नियमों का उपयोग करना उद्देश्य है। सभी भूभौतिकीय क्षेत्र विभव विसरण एवं तरंग समीकरण जैसे द्वितीय घात आंशिक अवकल समीकरणों द्वारा संचालित होते हैं। विभव एवं तरंग समीकरण पृथ्वी की संरचना के समझने के लिए उपयोगी हैं जबकि विसरण समीकरण उसके क्रमिक विकास का समना करने में मदद करता है। जटिल पिंडों की ज्यामिति एवं बनावट को समझने के लिए ऐनलॉग अनुकार एवं संख्यात्मक प्रतिरूपण अपनाया जाता है। उपर्युक्त समीकरण केंद्री अध्ययनों के अलावा, महत्वपूर्ण पृथ्वी प्रक्रियाओं की आवर्तिता को समझने के लिए बृहत अंतर्राष्ट्रीय डाटासेटों का संसाधन नियमित रूप से किया जाता है। इसमें अवगम सिद्धान्त ने एक निर्धारणात्मक भूमिका निभायी।